
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान से किए गए अपने वादे के मुताबिक़ मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं चल रही थीं और अब सिद्धारमैया के इस्तीफ़े के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया है।इस्तीफ़ा देने के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि उनका यह फैसला पार्टी और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान में लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सक्रिय राजनीति से दूर नहीं होंगे, बल्कि सामाजिक न्याय, संविधान और जनता के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल के दौरान लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं और राज्य के विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़, कांग्रेस हाईकमान पहले से तय फार्मूले के तहत नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही थी। अब नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर पार्टी के भीतर बैठकों का दौर तेज हो गया है। वहीं विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का परिणाम बताया है।सिद्धारमैया के समर्थकों में भावुक माहौल देखने को मिला। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें एक लोकप्रिय और जमीनी नेता बताते हुए उनके फैसले का सम्मान किया। कर्नाटक की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की सियासत पर बड़ा असर डाल सकता है।
