डीएलएसए सरायकेला-खरसावां की संवेदनशील पहल, बौद्धिक रूप से अक्षम महिला और उसकी दो वर्षीय बच्ची को मिला उपचार व संरक्षण

सरायकेला-खरसावां जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए एक बौद्धिक रूप से अक्षम महिला एवं उसकी लगभग दो वर्षीय बच्ची को चिकित्सा सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नए बस स्टैंड, सरायकेला के समीप उक्त महिला अपनी दो वर्षीय बच्ची के साथ असहाय अवस्था में भटकती हुई पाई गई थी। मामले की जानकारी पारा विधिक स्वयंसेविका (पीएलवी) तारामनी बंदिया द्वारा डीएलएसए के सचिव श्री तौसीफ मेराज को दी गई, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।
डीएलएसए के सचिव के प्रयासों से बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाई, वन स्टॉप सेंटर और चाइल्डलाइन के संयुक्त सहयोग से महिला और उसकी बच्ची को सुरक्षित रूप से अस्पताल में भर्ती कराया गया।
महिला को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के लिए भेजा गया है, जहां उसकी चिकित्सीय जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। वहीं दो वर्षीय बच्ची का उपचार सरायकेला सदर अस्पताल के एमटीसी (बाल रोग विभाग) में किया जा रहा है। जांच में बच्ची का वजन सामान्य से कम पाया गया, जिसके बाद उसे विशेष पोषण और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
डीएलएसए ने कहा कि असहाय, जरूरतमंद और कमजोर वर्ग के लोगों को समय पर विधिक सहायता, संरक्षण और सरकारी सेवाओं से जोड़ना प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से महिला और उसकी बच्ची को समय पर सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और संस्थागत संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका, जो संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी अंतर-विभागीय समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
