
मुंबई: महाराष्ट्र में शुक्रवार को शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान पार्टी के दोनों धड़ों के बीच सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई। एक ओर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भावुक अंदाज़ में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी को बालासाहेब ठाकरे की विरासत का असली उत्तराधिकारी बताया।
शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी प्रमुख पद से इस्तीफ़ा देने की पेशकश कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप सही हैं, तो वे पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को गंदी राजनीति करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। साथ ही उन्होंने उन अटकलों को भी सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) कांग्रेस में विलय करने जा रही है।
स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुटों के बीच हुई तीखी बयानबाज़ी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सियासी खींचतान लगातार तेज़ होती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना द्वारा उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं और सांसदों को अपने साथ जोड़ने की मुहिम को कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया है।
इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें भी तेज़ हो गई हैं। पार्टी के संसदीय दल की हालिया बैठक में इन छह सांसदों की अनुपस्थिति ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
गौरतलब है कि शिवसेना की स्थापना दिवंगत नेता Bal Thackeray ने की थी। पार्टी की पहचान लंबे समय से ‘टाइगर’ यानी बाघ की छवि से जुड़ी रही है, जिसे शिवसेना की ताकत और आक्रामक राजनीतिक शैली का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम को भी राजनीतिक तौर पर खास महत्व के साथ देखा जा रहा है।
