
कोल्हान/ पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी राखा माइंस (संवाददाता), 19 जून 2026:कोल्हान डिविजन के पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत मुसाबनी ब्लॉक के मुर्गा गुट्टू पंचायत के मुर्गा गुट्टू गांव में शुक्रवार को माझी परगना व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा का आयोजन किया गया। युवा क्रांतिकारी अमित महतो, मलय महतो और माझी परगना व्यवस्था के प्रानिक भोलानाथ टुडू की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। ग्रामसभा के दौरान युवा आंदोलनकारी नेता श्री अमित महतो ने कहा कि ग्रामीणों के हक़ अधिकारों के लिये लड़ना ही मेरे जिंदगी का मकसद l
अचानक हुई तेज बारिश के बावजूद ग्रामीणों का हौसला डगमगाया नहीं और उन्होंने छाते व पेड़ों की ओट में ही अपनी आवाज बुलंद रखी। ग्राम सभा में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) की राखा माइंस का टेंडर लेकर संचालन कर रही जिंदल कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। अमित महतो की कमान में ग्रामीणों ने कंपनी पर स्थानीय लोगों के शोषण और सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने के कई गंभीर आरोप लगाए और एक बड़े महा-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया।
केमिकल युक्त पानी से बढ़ रहा है बीमारियों का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में जिंदल कंपनी द्वारा राखा माइंस में डी-वाटरिंग (खदान से पानी निकालने) का काम किया जा रहा है। अत्यधिक pH मान और भारी मात्रा में मिनरल्स घुले होने के कारण यह पानी बेहद खतरनाक है। केंद्र सरकार के माइनिंग नियमों (Central Mining Rules) के अनुसार इस पानी को बिना फिल्टर/ट्रीट किए बाहर नहीं बहाया जा सकता, लेकिन कंपनी इसे सीधे स्थानीय छोटे नालों में मिला रही है। इस वजह से ग्रामीणों के नहाने, कपड़े धोने, मवेशियों के पीने और धार्मिक कार्यों (मरखी) के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी जहरीला हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
रोजगार नीति में धांधली और बिचौलियों को शह
ग्राम सभा में विस्थापन नीति की अनदेखी का मुद्दा भी गरमाया रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस में नई भर्तियों के लिए स्थानीय प्रभावितों और विस्थापित युवाओं को प्राथमिकता देने के बजाय, मोटी रकम के लेन-देन के जरिए बाहरी लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं। इसके अलावा, सालों पहले विस्थापित हुए ग्रामीणों को दिए गए क्वार्टर आज मेंटेनेंस के अभाव में जर्जर हो चुके हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। गंभीर आरोप यह भी है कि कंपनी के लिए बिचौलिये का काम करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों के घरों को तो चमकाया जा रहा है, जबकि आम विस्थापित मौत के साये में जीने को मजबूर हैं।
रास्ते का अधिग्रहण और गंदे टैंकरों से बढ़ी नाराजगी
ग्रामीणों ने कहा कि जिस स्थानीय नाले का उपयोग वे पीढ़ियों से कर रहे हैं, उसे कंपनी अपनी बाउंड्री वॉल के अंदर ले रही है, जिससे उनके आवागमन का रास्ता बंद होने की कगार पर है। वहीं, वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कंपनी द्वारा भेजे जा रहे पानी के टैंकर इतने गंदे और दूषित हैं कि उनका पानी पीने लायक ही नहीं है। क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह जर्जर हैं और सीएसआर (CSR) के तहत मिलने वाली शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं भी नदारद हैं।
#अमित महतो ने कहा:-“हमने देश के विकास के लिए अपनी जमीनें दीं, अपना हंसता-खेलता घर-द्वार उजाड़ा। आज जब माइंस फिर से शुरू हो रही है, तो हमें प्रदूषण, जर्जर मकान और गंदा पानी तोहफे में मिल रहा है, जबकि हमारा हक बाहरी लोगों को बेचा जा रहा है। यह शोषण अब और बर्दाश्त नहीं होगा।”— अमित महतो, ग्राम सभा (मुर्गा गुट्टू)
माझी बाबा की अध्यक्षता में होगी महा-ग्रामसभा, दी आंदोलन की चेतावनी
बारिश के कारण बैठक में उत्पन्न व्यवधान को देखते हुए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जल्द ही माझी बाबा की अध्यक्षता में एक विशाल महा-ग्रामसभा बुलाई जाएगी। इस आगामी बैठक में क्षेत्र के सभी 100 से अधिक विस्थापित परिवारों की पूर्ण भागीदारी अनिवार्य की गई है।इसी महा-बैठक में कंपनी के खिलाफ एक निर्णायक आंदोलन की रूपरेखा और तिथि (तारीख) की घोषणा की जाएगी। ग्रामीणों ने साफ किया है कि वे एक मजबूत मांग पत्र (Memorandum) तैयार कर रहे हैं, जिसे स्थानीय प्रशासन (CO/SDO), माइनिंग विभाग और राखा माइंस प्रबंधन को सौंपकर सीधे आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।निवेदक,ग्रामसभा मुर्गागुटू, घाटशिला
